First page of the हिंदी लेख archive.

हिंदी लेख पाकिस्तान के लिए संबंधित

‘भाषा को धर्म सेजूड़ना भाषा अन्याय है’

Posted by admin on February 21, 2016 (Comments Closed)

शिराज हसन
बीबीसी उर्दू संवाददाता, इस्लामाबाद

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मादर भाषाओं के दिन के हिसाब से दो दिवसीय मेले के पहले दिन क्षेत्रीय भाषाओं के संबंध में विचार विमर्श और समारोहों का आयोजन किया गया।

शनिवार को लोक विरासत और राष्ट्रीय विरासत संग्रहालय में आयोजित इस मेले में एक ऐसी किताब परिचयात्मक समारोह भी आयोजित हुई जो कला का एक अनूठा नमूना थी।

इस पुस्तक में सैयद मोहम्मद अनवर द्वारा बनाए गए 60 से अधिक कलाकृतियों की तस्वीरें शामिल हैं लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है सुलेख के इस नमूने हिंदी देवनागरी और उर्दू के नसपलीक लिपि को मिलाकर कलाकार किए हैं।
‘सामरोप रचना। केली ग्राफिक अभिव्यक्ति बंद अपनी बोली ‘शीर्षक पुस्तक के लेखक डॉ। सैयद मोहम्मद अनवर पेशे से वकील हैं।
सैयद मोहम्मद अनवर हिंदी उर्दू को ‘अपनी बोली’ कहते हैं और उनके अनुसार एक ही भाषा के दो अलग लिपि उपमहाद्वीप पाक व भारत के आम सांस्कृतिक और भाषाई विरासत हैं।

पुस्तक के लेखक अपनी रचना को पाकिस्तान में हिंदी के बारे में पूर्वाग्रह उन्मूलन और पाकिस्तान भारत दोमेान दूरियां कम करने का प्रयास बताते हैं।
सैयद मोहम्मद अनवर ने बीबीसी से बात करते हुए किताब के शीर्षक के हवाले से बताया कि सामरोप ‘संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका मतलब है संगतता जबकि डिजाइन को हिंदी में रचना कहा जाता है।

उनका कहना था कि ऐसे डिजाइन जो आपस में अनुसार रखते हों उन्हें सामरोप रचना का नाम दिया जा सकता है। उनका कहना था कि हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में संगतता और समानता पाई जाती और इन दोनों भाषाओं की एक साथ सुलेख लिए दोनों भाषाओं में संगतता और समानता दिखाने का एक प्रयास है।

पाकिस्तान में रहते हुए हिंदी सीखने की अवस्था के बारे में उनका कहना था कि ‘मेरी मां शोधक यूनुस प्रारंभिक जीवन विभाजन से पहले भारत के शहर फरीदाबाद में कालातीत थी जहां उन्होंने स्कूल में हिंदी लिखना सीखा था और मुझे अपनी मां से हिन्दी सीखने का मौका मिला। ‘
वे बताते हैं कि सत्तर के दशक में जब वह स्कूल में पढ़ते थे तोगरमयों की छुट्टियों के दौरान मुझे घर से बाहर खेलने कूदने से मना किया था। ‘ऐसे ही एक दिन मेरी माँ ने मुझे अपनी अपने पास बैठाकर देवनागरी लिपि में मेरा नाम लिखा और कहा, मैं भी ऐसे ही लिखूं।’
सैयद मोहम्मद अनवर बताते हैं कि उस दिन मुझे आश्चर्य हुआ कि एक ही भाषा दो लिपि में लिखी जा सकती है और इसी तरह हिंदी लिखने का अभ्यास जारी रही।

सैयद मोहम्मद अनवर के अनुसार किसी भी भाषा को धर्म के साथ जोड़ना इस भाषा के साथ, उसके बोलने वालों के साथ और इस क्षेत्र के साथ अन्याय है।

वे कहते हैं कि आमतौर प्रत्येक हिन्दी को हिन्दुओं या भारत के नाम जोड़कर नफरत की निगाह से देखा जाता है, जबकि भाषा का धर्म से संबंध नहीं है।
‘अगर भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में देखा जाए तो हिंदी और दोनों दोनों इस क्षेत्र की भाषाएँ हैं और यदि दोनों सीखने से दोनों देशों के बीच दूरियों में भी कमी लाई जा सकती है और हमें देवनागरी भाषा में लिखे बे बहा साहित्य तक भी पहुँच प्राप्त हो सकती जिसे उर्दू लिपि में ढाला जा सकता है। ‘

‘अगर अंग्रेजी लिखते और बोलते हुए किसी को कोई समस्या नहीं है तो देवनागरी लिपि को भी भेदभाव की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए।’
सैयद मोहम्मद अनवर बताते हैं कि उन्होंने अपनी कला सुलेख में भी इन्हीं विषयों को कवर किया है, जो इस क्षेत्र के संयुक्त। उनका कहना था कि उन्होंने हिंदी और उर्दू में जो शब्द एक साथ लिखे उनकी तस्वीरें भी सुलेख के मामले में कलाकार हैं।

एक सवाल के जवाब में उनका कहना था कि ‘हमें पाकिस्तान में हिंदी के अतीत, वर्तमान या भविष्य की चिंता नहीं करनी चाहिए बल्कि यह देखना चाहिए कि एक भाषा लिपि आधारित हिंदू मुस्लिम में विभाजित इसलिए महत्वपूर्ण है कि भाषा के लिपि को धर्म या किसी देश के साथ संबद्ध नहीं किया। हिन्दी या उर्दू के प्रति पूर्वाग्रह का सफाया किया जाना चाहिए।

जनरल (सेवानिवृत्त) जुल्फिकार अली भुट्टो

Posted by admin on February 21, 2016 (Comments Closed)

विस्तार ख़ान
बीबीसी उर्दू संवाददाता, कराची

इस्लामाबाद जो निचले अदालत पिछले ढाई साल से लाल मस्जिद के व्यवस्थापक गाजी अब्दुल के मकदमहٔ हत्या की सुनवाई कर रही है इस मामले में आवश्यक एकमात्र आरोपी जनरल (रिटायर्ड) परवेज़ मुशर्रफ को आज तक अपने सम्मुख नहीं देख स्की.षालानकह यह अदालत इस अवधि में तीन बार जनरल साहब के अविश्वसनीय गारंटी गिरफ्तारी वारंट निकाल चुकी है।

ताजा वारंट पिछले दिन जारी करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश परवेज समर्थ मेमन ने कहा कि आरोपी जानबूझकर अदालत में पेश नहीं हो रहा और अपने ड्राइंग रूम में बैठ कर न्याय का तलबगार है।

यह मुकदमा भी शायद दर्ज न होता अगर आईएचसी सितंबर तेरह में पर्चा काटने का आदेश न देती। पुलिस ने इस आदेश बादल नसुाज्यह अनुपालन तो कर दी लेकिन अदालत के समक्ष जो चालान पेश किया उसमें एकमात्र आरोपी परवेज मुशर्रफ का नाम चालान कॉलम नंबर दो में डाला गया। इस का मतलब है कि जांच अधिकारी तो आरोपी को निर्दोष मानता है आगे अदालत चाहते हैं। इतने रियायती चालान के बावजूद आरोपी ने अदालत में पेश होना तज़ीह बार समझा।

जनरल परवेज मुशर्रफ के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद छह तोड़ने के आरोप में जो मुकदमा लंबित है। वह बहुत पहले ही ट्रक बत्ती के पीछे लगाया गया और वादी (सरकार) भी अब इस बारे में चर्चा करते लजाता है।

अकबर बुगटी हत्याकांड में जनरल साहब एक पेशी भुगतने बिना बरी हो गए। मृतक गाजी अब्दुल भाई अब्दुल जनरल मुशर्रफ को माफ कर चुके हैं मगर गाजी पुत्र हारून रशीद मुकदमा चलवा पर कमर कस है।

पाकिस्तान न तो चली है जहां जनरल पनोशे को व्हीलचेयर पर बैठाकर अदालत में पेश किया जाए, न तुर्की जहां पूर्व सैन्य जनरलों को उखाड़ फेंकने की साजिश के आरोप में सलाखों के पीछे कर के मामले भुगतने के लिए मजबूर किया और न ही कोई टूटता हुआ सोवियत संघ जहां जनरल तीन दिन सरकार के बाद हाँफ़ जाएं और खुद को अस्थायी अपदस्थ राष्ट्रपति गोरबचौफ सौंप दें।

इस लिहाज से पाकिस्तान की अपनी पहचान है। यह मिस्र, थाईलैंड, इंडोनेशिया, पूर्व गोरे लोग दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया के बीच कोई मलगोबाई प्रशासनिक रूप है। यह चयन जवाबदेही राज्य है जहां तय है कि कौन किसके जवाबदेही का जन्म अधिकृत है। जवाबदेही छूत स्तन इस प्रणाली इतनी पारदर्शी है कि कोई नेत्रहीन भी देख सकता है कि ब्राह्मण कौन है और खशतरी, विष और शूद्र कौन।
हालांकि राज्य सिंहासन के चारों खोनों पर सोने के पानी से ‘संघ’ उत्कीर्ण है। सरीर प्रतिक्रिया सिंहासन के माथे पर संवैधानिक प्रभुत्व का झूमर भी है और कानून की नज़र में सब बराबर का मोरछल भी लगातार झल्ला जा रहा है। मगर इस शेर का दरबार है। जहां हर शिकार के तीन हिस्से बराबर बराबर कर रहे हैं। एक हिस्सा शेर का दूसरा शेर के वास्तविक और अपनाया बच्चों का और तीसरा सामने धरा है। जिसमें अदालत, संसद या आम आदमी में हिम्मत हो उठा ले जाए।

कौन सा अनुच्छेद छह, कैसा एनएबी, किसके गिरफ्तारी वारंट, किधर की पेशी। सोचिए अगर भुट्टो साहब जनरल (सेवानिवृत्त) जुल्फिकार अली भुट्टो होते तो उनके साथ अधिक से अधिक क्या होता?