जनरल (सेवानिवृत्त) जुल्फिकार अली भुट्टो

Posted by admin on February 21, 2016

विस्तार ख़ान
बीबीसी उर्दू संवाददाता, कराची

इस्लामाबाद जो निचले अदालत पिछले ढाई साल से लाल मस्जिद के व्यवस्थापक गाजी अब्दुल के मकदमहٔ हत्या की सुनवाई कर रही है इस मामले में आवश्यक एकमात्र आरोपी जनरल (रिटायर्ड) परवेज़ मुशर्रफ को आज तक अपने सम्मुख नहीं देख स्की.षालानकह यह अदालत इस अवधि में तीन बार जनरल साहब के अविश्वसनीय गारंटी गिरफ्तारी वारंट निकाल चुकी है।

ताजा वारंट पिछले दिन जारी करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश परवेज समर्थ मेमन ने कहा कि आरोपी जानबूझकर अदालत में पेश नहीं हो रहा और अपने ड्राइंग रूम में बैठ कर न्याय का तलबगार है।

यह मुकदमा भी शायद दर्ज न होता अगर आईएचसी सितंबर तेरह में पर्चा काटने का आदेश न देती। पुलिस ने इस आदेश बादल नसुाज्यह अनुपालन तो कर दी लेकिन अदालत के समक्ष जो चालान पेश किया उसमें एकमात्र आरोपी परवेज मुशर्रफ का नाम चालान कॉलम नंबर दो में डाला गया। इस का मतलब है कि जांच अधिकारी तो आरोपी को निर्दोष मानता है आगे अदालत चाहते हैं। इतने रियायती चालान के बावजूद आरोपी ने अदालत में पेश होना तज़ीह बार समझा।

जनरल परवेज मुशर्रफ के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद छह तोड़ने के आरोप में जो मुकदमा लंबित है। वह बहुत पहले ही ट्रक बत्ती के पीछे लगाया गया और वादी (सरकार) भी अब इस बारे में चर्चा करते लजाता है।

अकबर बुगटी हत्याकांड में जनरल साहब एक पेशी भुगतने बिना बरी हो गए। मृतक गाजी अब्दुल भाई अब्दुल जनरल मुशर्रफ को माफ कर चुके हैं मगर गाजी पुत्र हारून रशीद मुकदमा चलवा पर कमर कस है।

पाकिस्तान न तो चली है जहां जनरल पनोशे को व्हीलचेयर पर बैठाकर अदालत में पेश किया जाए, न तुर्की जहां पूर्व सैन्य जनरलों को उखाड़ फेंकने की साजिश के आरोप में सलाखों के पीछे कर के मामले भुगतने के लिए मजबूर किया और न ही कोई टूटता हुआ सोवियत संघ जहां जनरल तीन दिन सरकार के बाद हाँफ़ जाएं और खुद को अस्थायी अपदस्थ राष्ट्रपति गोरबचौफ सौंप दें।

इस लिहाज से पाकिस्तान की अपनी पहचान है। यह मिस्र, थाईलैंड, इंडोनेशिया, पूर्व गोरे लोग दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया के बीच कोई मलगोबाई प्रशासनिक रूप है। यह चयन जवाबदेही राज्य है जहां तय है कि कौन किसके जवाबदेही का जन्म अधिकृत है। जवाबदेही छूत स्तन इस प्रणाली इतनी पारदर्शी है कि कोई नेत्रहीन भी देख सकता है कि ब्राह्मण कौन है और खशतरी, विष और शूद्र कौन।
हालांकि राज्य सिंहासन के चारों खोनों पर सोने के पानी से ‘संघ’ उत्कीर्ण है। सरीर प्रतिक्रिया सिंहासन के माथे पर संवैधानिक प्रभुत्व का झूमर भी है और कानून की नज़र में सब बराबर का मोरछल भी लगातार झल्ला जा रहा है। मगर इस शेर का दरबार है। जहां हर शिकार के तीन हिस्से बराबर बराबर कर रहे हैं। एक हिस्सा शेर का दूसरा शेर के वास्तविक और अपनाया बच्चों का और तीसरा सामने धरा है। जिसमें अदालत, संसद या आम आदमी में हिम्मत हो उठा ले जाए।

कौन सा अनुच्छेद छह, कैसा एनएबी, किसके गिरफ्तारी वारंट, किधर की पेशी। सोचिए अगर भुट्टो साहब जनरल (सेवानिवृत्त) जुल्फिकार अली भुट्टो होते तो उनके साथ अधिक से अधिक क्या होता?